आउटसोर्स कर्मचारी भगवान भरोसे, मंत्री ने कहा नीति के लिए प्रार्थना करें!


अंशुल शर्मा।सरकाघाट।

माकपा ने ब्यान की कड़ी आलोचना औऱ नीति बनाने की उठाई माँग
सरकाघाट
हिमाचल प्रदेश सरकार के वरिष्ठ मंत्री व आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए नीति बनाने वाली उपसमिति के अध्यक्ष महेंद्र सिंह ठाकुर ने आउटसोर्स कर्मचारियों के प्रतिनिधिमंडल को उन्हें रैगुलर करने बारे गणतंत्र दिवस के दिन बिलासपुर में एक अजीबोगरीब उत्तर दिया।

जिसमें उन्होंने आउटसोर्स कर्मचारियों को उनके लिए नीति बनने के लिए भगवान से प्रर्थना करने की राय दी है।इस पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के नेता व भूपेंद्र सिंह ने इस तरह के उत्तर की कड़ी निंदा और आलोचना की है।उन्होंने कहा कि आउटसोर्स कर्मचारियों को रैगुलर करने के लिए नीति बनाने का वादा भाजपा ने चार साल पहले सरकार बनने से पहले प्रदेश के आउटसोर्स कर्मचारियों से किया था जिसे वे भूल गए हैं। अब जब इस सरकार का आखिरी वर्ष चल पड़ा है तो अब जाकर उनके लिए नीति बनाने के लिए एक उपसमिति गठित की गई है जो इन्हें विभागों में समाहित करने के लिए सरकार को सुझाव देगी जिसका अध्यक्ष जलशक्ति मंत्री को बनाया गया है जबकि उन्ही के जलशक्ति विभाग में सौ रुपये दैनिक मज़दूरी पर भर्तियां हुई हैं।भूपेंद्र सिंह ने कहा कि प्रदेश में आउटसोर्स कर्मचारियों की संख्या चालीस हजार के आसपास है जिन्हें डेढ़ सौ अलग अलग कम्पनियों के माध्यम से रखा गया है लेकिन इन् कर्मचारियों का नियोक्ता कम्पनियां शोषण कर रही हैं।जिसके कारण विभागों से जो राशी कम्पनियों को मिलती है उसमें से कटौती कर करके आगे दी जाती है और उनका मासिक वेतन हर माह के बजाये सात आठ महीनों के बाद जारी होता है।कम्पनियां मजदूरों को जो सामाजिक सुरक्षा के लाभ भी नहीं जारी करती है और उनका सीपीएफ भी नहीं जारी किया जाता है।बहुत से मज़दूरों को न्यूनतम वेतन भी नहीं मिलता है।ये कम्पनियां अपनी मनमर्ज़ी के आधार पर मजदूरों को वेतन जारी करती हैं और उन पर सरकार का कोई नियंत्रण नहीं है।मजे की बात है कि महेंन्द्र सिंह के नेतृत्व वाले जलशक्ति विभाग में ही क्लीनवेज कम्पनी मजदूरों को तीन हज़ार रुपये मासिक अर्थात सौ रुपये दैनिक मज़दूरी दे रही है जो जलशक्ति मंत्री और उप समिति के अध्यक्ष महेंद्र सिंह ठाकुर को भली भांति विदित है।लेकिन अब वे आउटसोर्सिंग कर्मचारियों को भगवान से प्रर्थना करने की राय दे रहें हैं जबकि इस नीति के तहत हो रहे शोषण के लिए वे और उनकी सरकार जिम्मेदार है और उन्होंने कर्मचारियों का शोषण रोकने के लिए चार साल तक कोई कदम नहीं उठाया।माकपा ने मांग की है कि सरकार को आउटसोर्स और ठेके पर कर्मचारी व मज़दूर रखने की नीति के बजाए रैगुलर आधार पर विभागों में भर्ती करनी चाहिए।पार्टी ने ये भी मांग की है कि जो कर्मचारी वर्तमान में विभिन्न विभागों में रखे गए हैं उन्हें कंट्रेक्ट व रैगुलर करने के लिए सरकार को जल्दी नीति बनानी चाहिए।पार्टी ने इसके लिए सभी कर्मचारियों से आह्वान किया है कि वे संगठित होकर सरकार के ख़िलाफ़ मोर्चा खोलें ताकि सरकार को नीति बनाने के लिए बाध्य किया जा सके।

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