ऑफिस बने आलीशान मजदूर हैं खस्ताहाल-भूपेंद्र



जलशक्ति विभाग मण्डल धर्मपुर में विभाग ने करोड़ो रूपये के आलीशान ऑफ़सों के भवन निर्मित कर दिए हैं लेक़िन विभाग में काम करने वाले मज़दूर खस्ताहाल हैं जिन्हें सरकार का न्यून्तम वेतन भी नसीब नहीं हो रहा है।माकपा नेता व पूर्व ज़िला पार्षद भूपेंद्र सिंह ने सूचना के अधिकार क़ानून के तहत जुटाई जानकारी से पता चला है कि धर्मपुर जलशक्ति मंडल में भवनों के निर्माण पर अब तक कुल ख़र्चा सात करोड़ से अधिक हो चुका है और बहुत से भवनों का निर्माण कार्य अभी चल रहा है।यहां निर्मित भवनों में एक्सईन कार्यालय, एस डी ओ धर्मपुर का कार्यालय तथा निरीक्षण कुटीर के नाम पर बने रेस्ट हाउस हैं।इन सब भवनों पर होने वाले ख़र्चे को जोड़ा जाए तो ये ख़र्च 15 करोड़ से भी ज़्यादा बैठेगा।भूपेंद्र सिंह ने बताया कि एक्सईन कार्यालय धर्मपुर स्थित भराड़ी के निर्माण पर 2.75 करोड़ रुपये ख़र्च हुआ है और इसके लिए ख़रीदी गयी ज़मीन पर 21 लाख रुपए खर्च किया गया है।बताया जाता है कि भराड़ी में बने एक्सईन ऑफिस के गेट पर ही 20 लाख रुपये खर्च आया है।इसके अलावा धर्मपुर में सहायक अभियंता के कार्यालय के निर्माण पर 1.55 करोड़ रुपये खर्च किया गया है।वर्त्तमान में इस भवन में अधीक्षण अभियंता का कार्यालय भी अस्थायी तौर पर चलाया जा रहा है।यही नहीं जलशक्ति मंडल के अंतर्गत निर्माणधीन निरीक्षण कुटीरों पर अभी तक चार करोड़ रुपये से अधिक ख़र्च हो चुका है इनमें से भराड़ी में बने एक निरीक्षण कुटीर का कार्य पूर्ण हो चुका है जिसका लोकार्पण जलशक्ति मंत्री ने अपने जन्मदिन के मौके पर 24 जनवरी को कर दिया है।इन सब भवनों का निर्माण ठेकेदारों के माध्यम से हुआ है और इनमें जो कट स्टोन पथर लगा है वह एक सताधारी पार्टी के स्टोन प्लांट से लिया गया है।भूपेंद्र सिंह ने आरोप लगाया है कि जलशक्ति मंत्री जो हमेशा ठेके के कामों को प्रथमिकता देते हैं ने भवनों के निर्माण के लिए दस करोड़ रुपये तथा पेयजल तथा सिंचाई योजनाओं के लिए 125 करोड़ रुपये यूनिप्रो कंपनी के माध्य्म से ख़र्च किये हैं जिसमें बड़े पैमाने पर नेता और अधिकारियों ने कमीशन खाई गयी है।इसलिए प्रदेश में सरकार बदलते ही पहला कदम ये उठाना चाहिए कि यहां जलशक्ति विभाग में चेहतों को दिए गए ठेकों में हुए भ्र्ष्टाचार व सरकारी धन के दुरुपयोग की निष्पक्ष जांच होनी चाहिये तो यह प्रदेश का सबसे बड़ा घोटाला जनता के सामने आएगा।भूपेंद्र सिंह ने जलशक्ति मंत्री पर आरोप लगाये हैं कि उन्होंने यहां पर जो साढ़े ग्यारह सौ युवक और युवतियां जकशक्ति विभाग में लगाई है उन्हें वे सरकार का नियुन्तम वेतन जो नौ हज़ार रुपये था और अब एक अप्रैल से साढ़े दस हजार रुपये मासिक हो गया है उतना भी नहीं दे रहे हैं।उनके नेतृत्व वाले महकमें में छह सौ जलरक्षकों को मात्र 3600 रु तीन सौ पंप ऑपरेटरों और डेढ सौ फ़िटरों को 4600 रु एक सौ मल्टी टास्क वर्करों को 3000 रु और डेढ़ सौ बेलदारों, चौकीदारों, डाटा एंट्री ऑपरेटरों को तीन हज़ार रुपये दिया जाता है।इस प्रकार जलशक्ति विभाग जो भर्तियां हुई हैं वे सब कम वेतन पर है जिन्हें बहुत कम वेतन दिया जा रहा है।सबसे ज्यादा हैरानी की बात तो ये यह कि जिस रोज़गार की चर्चा हर जगह हो रही है वह रोज़गार के नाम पर युवाओं के साथ धोखा है और उनका शोषण किया जा रहा है।धर्मपुर में जो बजट ख़र्च हुआ है वह सब भवनों,पाईपलाइनों व गाड़ियों पर हुआ है जबकि हज़ार से ज़्यादा मज़दूरों का शोषण किया जा रहा है और उनकी वितीय स्थिति खस्ता है।भूपेंद्र सिंह ने मांग की है कि विभाग में रखे गए मज़दूरों को नियुन्तम साढ़े दस हजार रुपये मासिक वेतन दिया जाए और इन्हें विभाग में मर्ज करने की नीति बनाई जाये।

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